भूतिया बंगला नंबर 17: एक डरावनी कहानी
यह कहानी तीन दोस्तों की है, जो अपने सपनों को पूरा करने के लिए एक बड़े शहर में आते हैं। उनका नाम विक्रम, सुनील और जॉन है। वह एक पुराने बंगले में रहने का निर्णय लेते हैं, जो जल्द ही उनके लिए एक डरावने अनुभव का कारण बनता है।
बंगले में प्रवेश

तीनों दोस्तों को एक दिन एक रहस्यमय महिला मिलती है, जो उन्हें एक पुराने बंगले का पता देती है। उसे देखकर लगता है कि वह किसी ने उन्हें मदद के लिए भेजा है। वे उस पते पर जाते हैं और पाते हैं कि वह बंगला एक बड़ी कंपनी के मालिक का है। चिट्ठी में मालिक का हस्ताक्षर देखकर, उन्हें काम मिल जाता है।
रहस्य का पर्दाफाश
काम के दौरान, विक्रम को पता चलता है कि वह बंगला पहले उसी कंपनी के मालिक का था। मालिक ने एक महिला कर्मचारी के साथ अवैध संबंध बनाए थे, जिससे वह महिला गर्भवती हो गई थी। जब महिला ने इसका विरोध किया, तो मालिक ने उसे मार डाला और उसकी लाश को बंगले के बगीचे में दफना दिया।
आत्मा का बदला
विक्रम की वजह से उस महिला की आत्मा जागृत होती है। वह मालिक की काली करतूतों का पर्दाफाश करती है और उसे सजा दिलवाती है। मालिक को गिरफ्तार कर लिया जाता है और उसकी सारी गंदगी दुनिया के सामने आ जाती है।
नैतिक शिक्षा
यह कहानी हमें यह सिखाती है कि बुराई का अंत निश्चित है। सचाई और न्याय की हमेशा जीत होती है, चाहे वह किसी भी रूप में सामने आए।
इस डरावनी कहानी ने हमें यह एहसास दिलाया कि कभी-कभी अजनबी मददगार बनकर हमारी मदद करते हैं, और हमें उनकी मदद को स्वीकार करना चाहिए।