1. बारिश की शाम — भीगी साड़ी और करीबियाँ
संध्या की हल्की बारिश ने पूरे शहर को एक अलग ही ताजगी में भर दिया था। आसमान में बादल गरज रहे थे, और रिया बालकनी में खड़ी होकर बारिश की हर बूँद को महसूस कर रही थी। उसने एक हल्की नीली साड़ी पहनी थी, जो भीग कर उसके बदन से चिपक गई थी। आरव दूर से उसे निहारते हुए उसके पास आया।
“इतनी भीग रही हो, ठंड नहीं लग रही?” आरव ने मुस्कुराते हुए पूछा।
रिया ने उसकी ओर देखा और शरारती अंदाज़ में बोली, “तुम्हारी आँखों की गर्मी से तो लग ही नहीं रही।”
ये सुनकर आरव ने उसे खींचकर अपनी बाहों में भर लिया। रिया की भीगी साड़ी से आती भीनी-भीनी खुशबू ने उसे मदहोश कर दिया। उसके गीले बालों की कुछ लटें उसके चेहरे पर चिपक गई थीं। आरव ने उन लटों को धीरे-धीरे हटाते हुए उसके गाल पर होंठ रख दिए।
रिया की साँसे तेज हो गईं। उसकी आँखों में एक अलग सी चमक थी। दोनों बारिश में हीगते-भीगते इतने करीब आ गए कि हर बूँद अब उनके शरीर को एक-दूसरे के एहसास की तरह छू रही थी। आरव ने रिया के कमर में हाथ डालते हुए उसे अपनी ओर खींचा, और दोनों एक-दूसरे में खो गए। वो बारिश अब सिर्फ मौसम की नहीं, उनकी चाहत की भी बन गई थी।
2. सर्दियों की सुबह — रजाई में सिमटी मोहब्बत
ठंडी हवाओं से भरी वो सुबह थी, जब रजाई के अंदर की गर्माहट किसी जन्नत से कम नहीं लगती। तान्या और नयन अपनी बड़ी सी रजाई में लिपटे हुए थे। कमरे में हल्की धूप झांक रही थी, लेकिन दोनों उठने का मन नहीं कर रहे थे।
तान्या ने अपनी आँखें खोलकर नयन को देखा, जो उसे निहार रहा था। “क्या देख रहे हो?” उसने धीमी आवाज़ में पूछा।
“तुम्हारी नींद भरी आँखें… दुनिया की सबसे खूबसूरत चीज़ हैं,” नयन ने उसे अपने करीब खींचते हुए कहा।
तान्या ने अपनी बाँहें उसकी गरदन में डाल दीं। नयन ने उसके माथे को चूमा और फिर धीरे-धीरे उसके गालों को सहलाने लगा। तान्या ने शरारत से कहा, “अगर तुम ऐसे ही करते रहे, तो मैं तो कभी उठने वाली ही नहीं।”
नयन ने मुस्कुराते हुए कहा, “यही तो चाहता हूँ, कि तुम यहीं मेरे पास रहो, मेरी बाहों में।” रजाई के भीतर दोनों के बीच की गर्माहट, उनके दिलों की धड़कनों की लय के साथ तेज होती गई। नयन ने तान्या को और करीब खींचा और उनके बीच कोई दूरी न रही। रजाई की नर्मी और उनके बीच की गर्माहट ने उस ठंडी सुबह को बेहद सुकूनभरी और हसीन बना दिया।
3. समंदर किनारे की रात — लहरों का संगीत
गोवा का समंदर किनारा, रात की चाँदनी में और भी खूबसूरत लग रहा था। रिया और विक्रम हाथों में हाथ डाले टहल रहे थे। समंदर की लहरें उनके पैरों को छूकर वापस लौट जातीं, जैसे कोई शरारती बच्चा।
“विक्रम, तुम्हें पता है, समंदर की ये लहरें मेरे दिल की तरह हैं, जो तुम्हें बार-बार छूना चाहती हैं,” रिया ने कहा।
विक्रम ने उसकी कमर में हाथ डालकर उसे करीब कर लिया। “अगर तुम समंदर हो, तो मैं उस किनारे की रेत हूँ, जो हर बार तुम्हें अपनी गोद में समेट लेना चाहता है।”
रिया मुस्कुरा दी। विक्रम ने उसके चेहरे को अपने हाथों में लेकर उसकी आँखों में देखा। फिर बिना कुछ कहे उसने उसके होंठों को अपने होंठों से छू लिया। वो एक नर्म लेकिन गहरा चुंबन था। रिया ने उसकी कमर को थाम लिया और दोनों के बीच का तापमान जैसे और बढ़ता चला गया।
समंदर की आवाज़ अब बैकग्राउंड संगीत बन गई थी। दोनों ने वहीं रेत पर बैठते हुए एक-दूसरे को बाहों में भर लिया। ठंडी हवा, चाँदनी और समंदर का संगम, दोनों के प्रेम को एक नई ऊंचाई पर ले गया। विक्रम ने रिया के कान में धीरे से कहा, “काश, ये रात कभी खत्म न हो।”
रिया ने उसकी गरदन में अपने होंठ रखकर जवाब दिया, “जब तुम पास हो, तो हर रात ऐसी ही हसीन हो जाती है।”