राधा का जन्म उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती जिले के नौशहरा गाँव में 21 मार्च 1998 को हुआ। पिता शिव सहाय लाल श्रीवास्तव ने उनकी गायन प्रतिभा को पहचाना और उनकी शास्त्रीय शिक्षा के लिए समुचित निकाय में दाखिला करवा दिया, अर्थात् भरतखंड संगीत विश्वविद्यालय लखनऊ और राष्ट्रीय कथक संस्थान लखनऊ । राधा बचपन से ही धार्मिक गीतों और लोक संगीत से प्रभावित रही और इस ग्रामीण परिवेश में अपनी सुरीली आवाज से लोगों को प्रभावित किया।
संगीत करियर की शुरुआत और पहचान

राधा ने 2017 में भाग लेकर भोजपुरी सिंगिंग शो “Sa Re Ga Ma Pa Rang Purvaiya” से शुरुआत की, जिसने उन्हें गोदा राष्ट्रीय मंच पर पहचान दी । उसके बाद, 2018 में उन्होंने Star Plus के मशहूर शो “Dil Hai Hindustani Season 2” में परफॉर्म किया, अपनी पारंपरिक भोजपुरी शैली से दर्शकों का दिल जीतते हुए।
Indian Idol 15 और वायरल परफॉर्मेंस

राधा का Indian Idol Season 15 में दिया गया परफॉर्मेंस वायरल हो चुका है। उन्होंने जानदार अंदाज में प्रस्तुत किया लोकप्रिय भोजपुरी लोक गीत “चटनिया ये सइया सिलवट पे पीसी”, जिस पर उनके प्रोफेसर – जजेज़, श्रोता तथा साक्षात्कारकर्ताओं – ने खूब तारीफ की। उनके इस परफॉर्मेंस पर सोशल मीडिया पर ज़ोरों से चर्चा भी हुई, तथा कुछ नेटिज़न्स ने अभी तक अनामित ज़ाहिर तौर पर उस शैली को अपनाने के लिए इसकी आलोचना भी की।
सफलता और विवाद

राधा का गाना “चटनिया” उन्हें पहचान दिलाने वाले प्रमुख गीतों में से एक है। इस गीत की लोकप्रियता के बाद उनकी सोशल मीडिया फॉलोइंग तेजी से बढ़ी। हालांकि कुछ आलोचकों ने गीत की शैली को लेकर विवाद खड़ा किया, राधा ने कभी इसे अपनाया हुआ नहीं माना और अपने पारंपरिक लोकनृत्य स्वरूप का ही पालन किया है।
पारिवारिक जीवन और सामाजिक उपस्थिति

राधा शादीशुदा हैं और उनके पति – अमित श्रीवास्तव भी संगीत जगत से जुड़े हैं। दोनों अक्सर सोशल मीडिया पर गानों के माध्यम से मज़ाकिया अंदाज़ में संवाद करते हुए नजर आते हैं, जिसमें वे गीतों की लाइनें साझा करते हुए हल्की-फुल्की जुगलबंदी करते हैं। इससे उनके फैंस को उनका सहज और परिवार-प्रेमी रूप पता चलता है।
राधा एक बच्चे की माँ भी हैं, और माँ बनने के बाद भी अपनी कला में निरंतर सक्रिय हैं। उनका परिवार उन्हें पूरा सहयोग देता है और भारतीय जनता के बीच उनका आदर बढ़ गया है।
संगीत और सलाह नए गायकों को
राधा का मानना है कि भाषा मायने नहीं रखती, एक कलाकार को केवल कहानी और संगीत की गुणवत्ता पर ध्यान देना चाहिए — चाहे वह भोजपुरी हो या हिंदी। वह भड़काऊ गीतों से बचने की चेतावनी देती हैं और गुणवत्ता प्रधान गानों को बढ़ावा देने की सलाह देती हैं।
निष्कर्ष
राधा श्रीवास्तव की कहानी प्रेरणादायक है — एक गाँव से निकलकर भोजपुरी संगीत की मान्यता मंच तक पहुँचने की। उनकी मेहनत, पारिवारिक सहयोग, और लोक संगीत के प्रति उनका जुनून उन्हें नया मुकाम दे रहा है। उनकी यात्रा उत्साहजनक है, और वाकई उनकी आवाज ने बड़ी पहचान बनाई है।