क्राइम हिंदी स्टोरी (पूरा संस्करण):
दुलारी के होश संभालते ही मां ने मन की जमीन पर संस्कारों के बीज डालने शुरू कर दिए थे, जो उम्र के साथ-साथ अब पेड़ की माफिक अपनी पक्की जड़ें जमा चुके हैं। पेड़ों को जड़ से उखाड़ना आसान है क्या? मगर जब पेट में आग लगे और सामने कोई रास्ता न बचे तो जड़ों को काटना ही पड़ता है।
उस रात जब आटे के कनस्तर का पेंदा आखिरकार जवाब दे गया, दुलारी ने आंसुओं को आंखों में ही रोक लिया। उसने धीरे से अपनी पुरानी साड़ी लपेटी और घर से निकल पड़ी। रास्ता वही था जो उसकी मां ने हमेशा मना किया था — गलत रास्ता, लेकिन अब यही एक रास्ता बचा था।
शहर की तंग गलियों में जाकर उसने एक पुराने जान-पहचान वाले को तलाशा — शम्भू। शम्भू का धंधा अच्छा-खासा चलता था। शराब, जुआ, लड़कियां — सबका इंतजाम करता था। दुलारी को देखते ही शम्भू ने आंखें तरेरीं, “क्या बात है दुलारी, तू इधर?”
दुलारी ने घबराहट छुपाते हुए कहा, “काम चाहिए शम्भू भाई… अब और नहीं सहा जाता।”
शम्भू ने मौका भांपते हुए कहा, “काम तो है, लेकिन उसके लिए हिम्मत चाहिए। एक बार घुस गई, तो पीछे हटने का मौका नहीं मिलेगा। सोच ले।”
दुलारी ने पल भर को सोचा, फिर हामी भर दी। शम्भू ने उसे समझाया, “कल रात आएगा एक बड़ा आदमी, उसके साथ जाना होगा। बात सिर्फ वक्त बिताने की नहीं, उसके पास कुछ कागज हैं… तुझे चुपचाप वो कागज निकाल लाने हैं।”
दुलारी को क्या मालूम था कि वो कागज असल में एक बड़े रैकेट का हिस्सा हैं, जिनमें जमीन-जायदाद से लेकर कालेधन की पूरी कहानी छिपी थी। अगली रात दुलारी ने जैसे-तैसे अपनी झिझक तोड़ी और उस आदमी के कमरे में पहुंच गई।
मगर अंदर जाकर उसे महसूस हुआ कि वो आदमी नशे में चूर है। मौका अच्छा था। उसने झटपट उस आदमी के ब्रीफकेस से कागज निकाले, पर तभी वो आदमी जाग गया। उसने दुलारी को पकड़ने की कोशिश की, लेकिन दुलारी ने पास रखा गिलास उसके सिर पर दे मारा। वो बेहोश हो गया।
भागते-भागते दुलारी शम्भू के पास पहुंची, लेकिन शम्भू ने जैसे ही कागज देखे, उसकी आंखों में लालच आ गया। उसने दुलारी को वहीं मार डालने का इरादा बना लिया। पर दुलारी अब कमजोर नहीं थी। उसने वहीं पड़ी एक छुरी उठाकर शम्भू पर वार कर दिया।
शम्भू वहीं ढेर हो गया। दुलारी भागते-भागते पुलिस स्टेशन पहुंची और सारी कहानी बयान कर दी। पुलिस ने उसे संरक्षण में ले लिया और उन कागजों के जरिए कई बड़े रसूखदारों की पोल खुली।
दुलारी आज भी उस रात को याद करती है, पर उसे पछतावा नहीं। क्योंकि वो जान गई थी — भूख से बड़ा अपराध कोई नहीं। मगर हालात से लड़ते-लड़ते उसने जो साहस दिखाया, उसी ने उसकी आत्मा को मरने से बचा लिया।
सीख: गरीबी इंसान को तोड़ती है, लेकिन अगर हिम्मत हो तो वही इंसान हालात को भी बदल सकता है।